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पंचतत्व चिकित्सा का 41 वां online प्रशिक्षत्र सत्र 23,24 सितंबर 2023

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🌎 पंचतत्व आरोग्यम सेवा संस्थान 🌎   द्वारा संचालित 🌄 पँचतत्व शोध, प्रशिक्षण व चिकित्सा संस्थान 🌄 का वां प्रशिक्षण शिविर - online माध्यम 23, 24 सितंबर 2023 (दिन शनिवार व रविवार)  मित्रो जैसा आप सबको विदित है कि        हमारे संस्थान के प्रणेता " श्रद्धेय श्री ब्रजमणी शास्त्री जी" द्वारा पिछले 7-8 वर्षों से भारत की प्राचीन व लोकोकित कहावतों के आधार स्तम्भ पर टिकी चिकित्सा प्रणाली जो कि सृष्टि के आरम्भ से ही सर्व मानव कल्याण के लिये हर गांव- घर में एक सरल नियम समय व ऋतु आधारित कार्यकलापो का पालन करके अन्याय व गम्भीर रोगों से लड़ने  के लिये सर्वमान्य सर्व सुलभ चिकित्सा प्रणाली थी जो आधुनिकता की ललक में विलीन होने के कगार पर है, जिसके लिये "पंचतत्व आरोग्यम सेवा संस्थान" के माध्यम से "शास्त्री ब्रजमणि जी" अपने अन्यान्य मित्रो के साथ पिछले 16-17 वर्षों से शोध कार्य मे संलग्न रहकर इसको और सरल रूप में लाने के प्रयास में कार्यरत रहकर समय-समय पर संस्थान के माध्यम से इसको आम जन तक पहुचने के कार्य मे संलग्न हैं। तो क्या था ? मान...

आजवाइन हमारी रसोई की दिव्य औषधी।

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🏵 कोरोना के साथ जीने की आदत 🏵

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🏵 कोरोना के साथ जीने की आदत 🏵 आज के 15 - 20 दिन पूर्व सूरत और अहमदाबाद से कई मित्रों ने बताया था कि हम लोगों को स्वदेशी औषधियों के विषय में बताकर जागरूक कर रहे हैं, हमारे कई साथी बहुत बड़ी मात्रा में कुछ औषधियाँ बाँट भी रहे है, क्योंकि यहाँ पर काफी लोगों को बुखार हो रहा है तथा संभवतः उनमें कोरोना भी फैला हो। एक सप्ताह पूर्व एक स्वास्थ्य कर्मचारी से बात हो रही थी, जिसमें उन्होंने बताया कि बिना जाँच किये बाहर से आये लोगों को पहले 14 दिन के लिए कोरोन्टाइन किया जाता था, तथा उन्हें 14 दिन बाद जब छुट्टी दी जाती है तो लगभग 2000 रुपये का राशन भी दिया जाता है। लेकिन अब तीन चार बाद ही उन्होंने घर भेज दिया जाता है।  स्वास्थ्य के विभाग के कर्मचारी व इलाज करा चुके कुछ लोगों ने यह भी बताया कि यह कोई जरूरी नहीं कि सर्दी - जुकाम, खाँसी - बुखार से ही कोरोना की पुष्टि हो सके कई लोगों को मात्र कई दिनों के सिर - दर्द, दस्त, शरीर में दर्द बने रहने, या भूख ना लगने की वजह से जब चेकअप कराया तो उनमें भी कोरोना संक्रमित होने की पुष्टि हुई।  मुम्बई से कुछ इलाज कर रहे लोगों ने बताया कि डॉक्ट...

दिनचर्या भाग 1 : स्वस्थ्य कौन है?

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🌅  *दिनचर्या भाग एक*   🌅         होली बीत चुकी है आप सब के लिए होली के विभिन्न रंगों के प्रयोग व लाभ पर भी होली पूर्व लेख दिया था, जिज्ञासु लोगों ने इसका लाभ उठाया। अब दिनचर्या की प्रतिक्रिया शुरू करेंगे।  🏵️ *दिनचर्या का भाग* 🏵️      स्वस्थ्य दिनचर्या हमारे जीवन का बेहद जरूरी आयाम है। स्वास्थय से ही जुड़ा हुआ हमारा त्रिदोष है इस विषय व्यापक चर्चा की जाये उसके पूर्व आपको अपनी दिन-चर्या का ज्ञान होना वेहद आवश्यक है। आपको बताना चाहूँगा कि वात-पित्त-कफ को समझने के बाद ही वातज-कफज , वातज-पितज , पितज-कफज और वात-पित्त-कफ ( सन्निपात )  समझ आयेगा क्योंकि यह त्रिदोष का संयुग्म है अतः इस पर लेख का विचार आपकी धारणा शक्ति व सक्रियता पर निर्भर करेगा।      *स्वस्थ्य है कौन है ...?* स्वास्थ्य तीन आयामों पर निर्भर करता है ।  १. *शारिरिक स्वास्थ्य लाभ* २. *मानसिक स्वास्थ्य लाभ* ३. *अध्यात्मिक स्वास्थ्य लाभ*        जो तीनो प्रकार से स्वस्थ्य है वही सुखी है, जो सुखी है वही धर्मयुक्त भी है। अक...

गर्भावस्था और खान-पान

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🏵 *आपन्नसत्वा के आहार* 🏵 गर्भवस्था में जागरूक महिलाओं को प्रतिमाह शिशु गर्भ के अनुसार खानपान का ध्यान रखना होता है।  *वीरप्रसविनी –* वीर पुत्र को जन्म देने वाली *बुधप्रसविनी –* विद्वान् को जन्म देने वाली *गर्भाधान के समय आहार :-*  *मधुमन्मे निष्क्रमणं मधुमन्मे परायणम्।* *वाचा वदामि मधुमद् ‘भूयासं’ मधुसंदृशः॥* ( मेरा जाना मधुर हो, मेरा आना मधुर हो। मैं मधुर वाणी बोलूँ, मैं मधु के सदृश हो जाऊँ। - अथर्ववेद जो माताएं गर्भाधान के समय अपने खानपान का संतुलन बनाये रखती है निश्चित ही वह अपने मामत्व का सिंचन कर रही होती है, चूँकि बच्चे का आहार भी उसकी कामलनाभि से जुड़ा होता है, अतः माता को वही सात्विक आहार लेना जिससे बच्चे का शारीरिक व प्रज्ञा का विकास होने के साथ साथ उनका प्रसव सुख-पूर्वक हो।  तेजस्वी संतान प्राप्ति के लिए जरूरी है कि माँ गर्भावस्था के दौरान अपनी मानसिक स्थति को प्रसन्नचित्त रखें , वाणी को संयमित करें तथा अपना आचरण व कर्म शुद्ध व सात्विक रखें।     दो शब्द है - आहार और विहार दोनों का तात्पर्य अलग है अतः पहले आहार पर बात करूँगा।   ...

चीन और कोरोना वायरस एवम पँचतत्व (भारत की वैदिक यज्ञ परम्परा)

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🏵️  चीन और कोरोना वायरस एवम भारत की वैदिक यज्ञ परंपरा।। 🏵️                --- कोरोना वायरस के कारणों पर शोध से चीन ने जो निष्कर्ष निकाले हैं वे परोक्ष रूप में भारतीय वैदिक संस्कृति का अनुमोदन करते हैं। जो कि इस प्रकार है:- 💐 हमारे प्राचीन ऋषियों ने वेदों के आधार पर शवों को अग्नि में जलाकर दाह संस्कार करने का विधान बनाया था। चीन ने घोषणा की है कि अगर शवों को जमीन में गाड़ देंगे, तो उनके शरीर में जो कोरोना वायरस या अन्य वायरस व बैक्टीरिया होते हैं वो जमीन में मिल जाएंगे और ये वायरस और बैक्टीरिया कभी नष्ट नहीं होंगे, बल्कि जमीन में ही फैलेंगे और जल तथा वायु को प्रदुषित करेंगे। शवों को जला देने से आग के जरिये वायरस और बैक्टीरिया सदा सदा के लिए ख़त्म हो जाते हैं। इसीलिए चीन ने घोषणा की है कि जितने भी लोग कोरोना वायरस से पीड़ित होकर मर रहे हैं, उन सभी का अंतिम संस्कार जलाकर ही किया जायेगा। 💐 वेद और वैदिक सहित्य में शाकाहार को ही मनुष्य का भोजन कहा गया है। मांसाहार रोगों को बढ़ाने वाला और महापाप की श्रेणी में आता है।जिसका सेवन स्...

होली के फायदे , होली के रँग प्रकृति के संग

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🏵 *पंचतत्व आरोग्यम सेवा संस्थान द्वारा होली की हार्दिक शुभ कामनायें*🏵    मिट्टी गोबर से होली खेलने का अपना एक अलग ही आनन्द था, एक महीने पहले से ही गाँव की गलियां बंद हो जाती थी, लोगो छतों पर, खंभों के पीछे बाल्टियां भर भर के रखते थे, हम किसी ना किसी बहाने किसी को बुलाकर लाते और औरतें पूरी पूरी बाल्टी उन पर उड़ेल देती थी, पूरी गली कनई से भर जाती थी, कई लोगों के पैर फिसल जाते थे और उसमें वो गिर पड़ते थे, और हम खूब हँसते थे...  गाँव से दूर तालाबों से एक महीने पहले ही भर भर के मिट्टी के ढेले लाकर रख देते थे, पर आज यह मिट्टी लुप्त हो गयी और इसकी जगह सिर्फ कृतिम रसायनिक सूखे अबीर - गुलाल ने ले लिया। जब से शहर में आया यहां की होली में वह उमंग खो गयी। कई लोग बच्चों के साथ किवाड़ बंद करके निःस्वास पलायन कर छत की मुंडेर पर बैठ जाते है... इतना ही नहीं कई लोगों को तो यह त्योहार इतना बुरा लगता है कि कोई बच्चा उनके ऊपर पानी या रंग डाल दे तो उसको काटने को दौड़ पड़ते है ..... ऐसे लोगों के कारण ही त्योहारों की संजीदगी खत्म होती जा रही है ..... जबकि इन्ही बच्चों से ही आज हमारे त्...